पवित्र नदियों में से एक है नर्मदा, नर्मदा जयंती पर जानें महत्व, पूजा विधि व कथा

पवित्र नदियों में से एक है नर्मदा, नर्मदा जयंती पर जानें महत्व, पूजा विधि व कथा 

कुछ ग्रंथों के अनुसार देवी नर्मदा की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई है और इस नदी के किनारे ज्योतिर्लिंग सहीत कई तीर्थ हैं। कई ऋषियों ने इसके किनारे तपस्या की हैं।

भोलेनाथ से हुई नर्मदा की उत्पत्ति
हुआ यूं कि एक बार भगवान शंकर लोक कल्याण के लिए तपस्या करने मैकाले पर्वत पहुंचे। उनके पसीने की बूंदों से इस पर्वत पर एक कुंड का निर्माण हुआ। इसी कुंड में एक बालिका उत्पन्न हुई। जो शांकरी व नर्मदा कहलाई।
सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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शिव के आदेशानुसार वह एक नदी के रूप में देश के एक बड़े भूभाग में रव (आवाज) करती हुई प्रवाहित होने लगी। रव करने के कारण इसका एक नाम रेवा भी प्रसिद्ध हुआ। मैकाले पर्वत पर उत्पन्न होने के कारण वह मैकाले सुता भी कहलाई।

ये है नर्मदा जयंती का महत्व
नर्मदा जयंती पर मां नर्मदा की पूजा की जाती है। भारत में नर्मदा जयंती को एक त्योहार के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार को मध्य प्रदेश के अमरकंटक में बड़ी ही धूमदाम के साथ मनाया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार इसी स्थान से मां नर्मदा की उत्पत्ति हुई थी। यह त्योहार माघ माघ के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन मनाया जाता है। भारत में 7 नदियों को अत्यधिक मान्यता दी गई है। नर्मदा उन्हीं सात नदियों में से ही एक महत्वपूर्ण नदी है।
गंगा की तरह ही नर्मदा में भी स्नान करने से सभी प्रकार के पार धुल जाते हैं। भगवान शिव ने नर्मदा नदी को देवताओं के पाप धोने का वरदान दिया था। इसलिए नर्मदा नदी को अधिक महत्व दिया जाता है। इतना ही नहीं यदि आप कालसर्प दोष से पीड़ित हैं तो नर्मदा जंयती के दिन चांदी के नाग नगिन का जोड़ा नर्मदा नदी में बहाने से कालसर्प दोष हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। मां गंगा की तरह ही मां नर्मदा की पूजा नर्मदा जयंती पर विशेष रूप से की जाती है।

ऐसे की जाती है नर्मदा जयंती पूजा-विधि
- मां नर्मदा की पूजा यदि संभव हो सके तो नर्मदा नदी के घाट पर ही करें। यदि आप ऐसा नहीं कर सकते तो आप घर पर भी मां नर्मदा की पूजा कर सकते हैं।
- इसके लिए आप सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करें स्नान के पानी में यदि हो सके तो नर्मदा नदी का जल या गंगाजल डालकर स्नान करें।
- स्नान करने के बाद सफेद वस्त्र धारण करें और एक चौकी पर गंगाजल छिड़क कर उस पर सफेद कपड़ा बिछाएं और उस पर 
             माँ नर्मदा जी की तस्वीर स्थापित करें।
सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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- इसके बाद मां गंगा को सफेद फूल, फल और सफेद मिठाई अर्पित करें।
- यह सब अर्पित करने के बाद मां नर्मदा के आगे गाय के घी का दीपक जलाएं और मां नर्मदा की विधिवत पूजा करें।
- इसके बाद मां नर्मदा के मंत्रों का जाप करें और उनकी कथा सुनें।
- कथा सुनने के बाद मां नर्मदा की आरती उतारें।
- मां नर्मदा की आरती उतारने के बाद मां नर्मदा को सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
- इसके बाद पूजा में हुई किसी भी तरह की भूल के लिए मां नर्मदा से क्षमा याचना करें।
- अंत में मां नर्मदा को चढ़ाया हुआ प्रसाद घर के सभी लोगों के बीच में वितरित करें।

मां नर्मदा की पावन कथा
पौराणिक कथा के अनुसार अंधकासुर भगवान शिव और मां पार्वती का पुत्र था। एक दैत्य हिरणायक्ष ने भगवान शिव की घोर तपस्या करके उन्हीं की तरह बलवान पुत्र पाने का वरदान मांगा।
भगवान शिव ने एक भी क्षण गंवाए अपने पुत्र अंधकासुर को हिरणायक्ष को दे दिया। हिरणायक्ष का वध भगवान विष्णु ने वाराह अवतार लेकर कर दिया था।
जिसके बाद अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए अंधकासुर ने अपने बल से देवलोक पर अपना आधिपत्य जमा लिया। जिसके बाद अंधकासुर ने कैलाश पर चढ़ाई कर दी और भगवान शिव और अंधकासुर के बीच में घोर युद्ध हुआ। जिसके बाद भगवान शिव ने अंधकासुर का वध कर दिया।
अंधकासुर के वध के बाद देवताओं को भी अपने पापों का ज्ञान हुआ। जिसके बाद वह सभी भगवान शिव के पास जाते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं कि हे प्रभु हमें हमारे पापों से मुक्ति दिलाने का कोई मार्ग बताएं।
जिसके बाद भगवान शिव के पसीने की एक बूंद धरती पर गिरती है। जिसके बाद वह बूंद एक तेजस्वीं कन्या के रूप में परिवर्तित हो गई। उस कन्या का नाम नर्मदा रखा गया और उसे अनेकों वरदान दिए गए।
भगवान शिव ने नर्मदा को माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी से नदी रूप में बहने और लोगों के पाप हरने का आदेश दिया। नर्मदा के इसी अवतरण तिथि को नर्मदा जंयती मनाई जाती है।
भगवान शिव की आज्ञा सुनकर मां नर्मदा भगवान शिव से कहती हैं कि हे भगवान मैं कैसे लोगों के पापों को हर सकती हूं।तब भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान देते हैं कि तुममें सभी पापों को हरने की क्षमता होगी।
नर्मदा जयंती 2020 तिथि
1 फरवरी 2020 नर्मदा जंयती 2020 शुभ मुहूर्त
सप्तमी तिथि प्रारम्भ - दोपहर 3 बजकर 51 मिनट से (31 जनवरी 2020)
सप्तमी तिथि समाप्त - शाम 6 बजकर 10 मिनट तक (1 फरवरी 2020)

नर्मदा के तट पर प्रमुख ज्योतिर्लिंग
12 ज्योर्तिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर इसके तट पर ही स्थित है। इसके अलावा भृगुक्षेत्र, शंखोद्वार, धूतताप, कोटीश्वर, ब्रह्मतीर्थ, भास्करतीर्थ, गौतमेश्वर।
चंद्रमा द्वारा तपस्या करने के कारण सोमेश्वर तीर्थ आदि 55 तीर्थ भी नर्मदा के विभिन्न घाटों पर स्थित हैं। वर्तमान समय में तो कई तीर्थ गुप्त रूप में स्थित हैं।

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